इनकम टैक्स
दरों में परिवर्तन / वित् वर्ष 2025-26 के
लिए होगी लागू
By Yogesh Verma (CS/LLB) / 5 min read / Budget
परिचय
भारत सरकार ने वित्त विधेयक, 2025 के माध्यम से प्रत्यक्ष करों (डायरेक्ट टैक्स) में कई महत्वपूर्ण संशोधन
प्रस्तावित किए हैं। यह विधेयक आयकर अधिनियम, 1961 में संशोधन
करके करदाताओं को राहत देने, कर प्रणाली को सरल बनाने और
निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाया गया है।
1. आयकर दरें (Income Tax Rates)
(A) व्यक्तिगत करदाताओं के लिए कर की नई दरें
- नई कर प्रणाली (धारा 115BAC) के अंतर्गत, वित्त
वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए कर
की दरें इस प्रकार होंगी:
कुल वार्षिक आय
|
कर की दर
|
₹4,00,000 तक
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कोई कर नहीं
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₹4,00,001 - ₹8,00,000
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5%
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₹8,00,001 - ₹12,00,000
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10%
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₹12,00,001 - ₹16,00,000
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15%
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₹16,00,001 - ₹20,00,000
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20%
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₹20,00,001 - ₹24,00,000
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25%
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₹24,00,000 से अधिक
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30%
|
- पुरानी कर व्यवस्था के तहत छूट और कटौतियां उपलब्ध रहेंगी, लेकिन यदि कोई नया विकल्प चुनता है, तो उसे उपरोक्त दरों के अनुसार कर का भुगतान करना
होगा।
(B) वरिष्ठ नागरिकों और 80 वर्ष से अधिक
आयु के करदाताओं के लिए कर में छूट
- 60-80 वर्ष की आयु वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹3,00,000 तक की आय पर कोई कर नहीं।
- 80 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए ₹5,00,000 तक की आय पर कोई कर नहीं।
(C) कंपनियों और फर्मों पर कर दरें
1.
साझेदारी फर्म
(Partnership
Firms) – 30%
2.
स्थानीय निकाय
(Local
Authorities) – 30%
3.
सहकारी
समितियाँ (Co-operative
Societies) –
o ₹10,000 तक - 10%
o ₹10,001 - ₹20,000 - 20%
o ₹20,000 से अधिक - 30%
4.
कंपनियाँ (Companies)
o जिनकी कुल वार्षिक टर्नओवर ₹400 करोड़ से कम है, उनके लिए कर दर 25% रहेगी।
o अन्य कंपनियों के लिए 30%।
2. निवेश और रोजगार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन
(A) अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) को बढ़ावा
- IFSC में काम करने वाली इकाइयों के लिए कर में छूट की अवधि 31 मार्च 2030 तक बढ़ा
दी गई है।
- विमान और जहाज लीजिंग व्यवसाय को भी कर लाभ दिए
जाएंगे।
- ग्लोबल ट्रेजरी सेंटर को 'डिविडेंड' की परिभाषा से बाहर रखा गया है, जिससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाभ होगा।
(B) स्टार्टअप्स के लिए कर लाभ
- स्टार्टअप्स को 100% कर छूट देने की योजना को 1 अप्रैल 2030 तक बढ़ा दिया गया है।
- यह छूट 10 वर्षों
में किसी भी
3 वर्षों के लिए उपलब्ध होगी।
3. सामाजिक-आर्थिक सुधार
(A) स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर
- स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर (Health & Education Cess) 4%
की दर से लागू रहेगा।
(B) धर्मार्थ ट्रस्ट और संस्थानों के लिए कर सुधार
- छोटे धर्मार्थ ट्रस्टों के लिए पंजीकरण की वैधता 5 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी गई है।
- धर्मार्थ ट्रस्टों के लिए दान की सीमा ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख प्रति व्यक्ति
प्रति वर्ष कर दी गई है।
4. कर प्रशासन में सुधार
(A) टीडीएस दरों में परिवर्तन
सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण
स्रोतों पर कर कटौती (TDS)
की दरों में परिवर्तन किया है:
सेक्शन
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स्रोत
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पुरानी सीमा
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नई सीमा
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194A
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बैंक और डाकघर में ब्याज
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₹40,000
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₹50,000
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194
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डिविडेंड आय
|
₹5,000
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₹10,000
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194H
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कमीशन और दलाली
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₹15,000
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₹20,000
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194-I
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किराया
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₹2,40,000 (वार्षिक)
|
₹50,000 (मासिक)
|
5. अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएँ
- अप्रत्यक्ष कर (GST) में कोई नई दरों में बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन अनुपालन से संबंधित नए नियम लागू होंगे।
- ई-इनवॉयसिंग और रिवर्स
चार्ज मैकेनिज्म (RCM) से जुड़े सुधार किए गए
हैं।
निष्कर्ष
वित्त विधेयक 2025 में आयकर दाताओं, कंपनियों, स्टार्टअप्स और IFSC में कार्यरत संस्थाओं को कई प्रकार की कर छूट और सुधार प्रदान किए गए हैं। नई कर प्रणाली के तहत आम करदाताओं को कम दरों पर कर चुकाने की सुविधा दी गई है। साथ ही, स्टार्टअप्स और निवेशकों के लिए प्रोत्साहन बढ़ाया गया है।
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